BEST ATTITUDE SHAYARI- MAI TO AHISTE-AHISTE CHALTA HUN

मैं न गिरता हूँ।
न संभलता हूँ।
न मैं तेज़ी से चलता हूँ।
इस तेज़ी से चल रही दुनियाँ में,
जिंदगी का हर मज़ा धीरे-धीरे लिए चलता हूँ,
मैं तो आहिस्ते-आहिस्ते चलता हूँ।

मैं तो आवारा बना फ़िरता हूँँ।

मैं न सोचता हूँ,
न समझता हूँ,
न किसी से कुछ कहता हूँ।
मैं तो खुद ही से बातें करता हूँ
मैं तो हूँ शान्त स्वभाव का,
मैं तो आहिस्ते-आहिस्ते चलता हूँ।

मैं न दिन की,
मैं न रात की,
मैं न वक़्त की परवाह करता हूँ।
मैं तो किसी भी वक्त अपने लफ़्जों को लिख दिया करता हूँ।
अपने सोच को शायरी में धीरे-धीरे उतार दिया करता हूँ।

मैं तो आहिस्ते-आहिस्ते चलता हूँ।

This Post Has 2 Comments

  1. Very nice

    1. Thanks

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